# cancer कैंसर का भी ईलाज है औषधीय नीम में

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औषधीय नीम

औषधीय नीम-

आसानी से हर जगह मिल जाने वाला औषधीय नीम का आयुर्वेद में एक विशेष स्थान है.प्राचीनकाल से कई प्रकार के औषधीय गुणों के कारण गुणकारी नीम सदियों से भारत में कीट-कृमिनाशी और जीवाणु-विषाणुनाशी के रूप में प्रयोग में लाया जाता रहा है.

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आज हम आपको नीम के कैंसररोधी गुणों के बारे में बताएगे। विज्ञान में हुए शोधो से यह पता लगा है की नीम के सभी चीजें जैसे पत्तिया, बीज, फूल और फल सभी में कैंसर रोधी गुण पाए जाते है।नीम में मुख्य रूप से Azadirachtin और  Nimbolide  पाए जाते है जो कैंसररोधी गुण रखते है। इसके इलावा नीम की पत्तियों में पाया जाने वाला विशेष प्रोटीन एनएलजीपी कैंसर को खत्म करने में बहुत ही विशेष है.

कैंसर से लड़ने की शक्ति देता है नीम-

नीम शरीर को कैंसर के प्रति लड़ने की शक्ति देता है ये हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है.नीम की पत्तियों में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन पाया जाता है जिसे Neem Leaf Glycoprotin के नाम से जाना जाता है। जो कैंसर कोशिकाओं के इलावा शरीर के अन्य भागो में भी इम्युनिटी को बढ़ाता है जो कैंसर कोशिकाओ की प्रगति को रोकने में काफी सहायक है। इम्युनिटी कोशिकाओं में कैंसर को मारने वाली कोशिकाओं का एक समूह होता है जिसे सीडी 8 प्लस टी कोशिकाएं कहते हैं। ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि के साथ ही एनएलजीपी की वजह से टी कोशिकाओं की तादाद भी बढ़ जाती है। इससे कैंसर को विकसित होने से रोकने में सहायता मिलती है. Neem Leaf Glycoprotin प्रोटीन टी कोशिकाओं को निष्क्रिय होने से भी बचाता है।
नीम की पत्तियों में जाने वाले रसायन कैंसर कोशिकाओ के विकास और उनकी प्रगति को रोक सकते है।

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नीम कैंसर कोशिकाओ को Apoptosis  की प्रक्रिया द्वारा नष्ट करने में सक्षम होता है ।Apoptosis एक प्रकार की कैंसर कोशिकाओं की चतवहतंउउमक बमसस कमंजी की प्रक्रिया होती है।नीम में पाए जाने वाले रसायन Beta carotene and vitamin C,  Azadirone, Deoxonimbolide, Kaemferol, Glucopyranoside, Nimbolide और  Quercetin  कोशिकाओं को फ्री रेडिकल के प्रभाव से बचाते है. ये फ्री रेडिकल कैंसर के कारक होते हैं. नीम में पाए जाने वाले तत्व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते है।नीम कैंसर कोशिकाओं में रक्त वाहिनियो के बनने की प्रक्रिया को कमजोर कर देता है जिससे कैंसर कोशिकाओ को पोषण मिलना बंद हो जाता है और वो नष्ट होना शुरू होती है। नीम पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण नीम के सामान्य कोशिकाओं पर कोई प्रभाव नहीं होता ये सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को ही प्रभावित करता है.

इस तरह करें सेवन-

नीम की ताजा पत्तियों को छाया में सुखा लीजिये और इसको पाउडर बना लीजिये. अभी इसका 2 से 5 ग्राम चूर्ण शहद के साथ या गुनगुने पानी के साथ ले लीजिये. और कैंसर के रोगी को नियमित नीम की दातुन करे. और इसके रस को फेंकने की जगह निगल ले. और बड़ी बात ये है के अगर कोई सामान्य व्यक्ति सिर्फ नीम की दातुन नियमित करे तो दांतों के रोग तो सही होंगे ही इसके साथ में उसको कैंसर जैसे भयंकर रोगों से भी छुटकारा मिलेगा.पहले के समय में नीम की दातुन ही लोग प्रयोग में लेते थे पर आधुनिकता के साथ अब टूथपेस्ट ने नीम का स्ािान ले लिया है जो घातक हो रहा है.

Cancer is also treated in neem

साभार-सुरेन्द्र मितल

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