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सात चरणों में होगें लोकसभा चुनाव-23 मई को होगी मतगणना

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आज प्रैस वार्ता में आचार सहिंता लगने सहित देश में होने वाले चुनावों की जानकारी दी। उन्होने बताया कि पहले चरण में 20 राज्यों के 91 सीटों पर होगें मतदान। पहले चरण का चुनाव मतदान 11 अप्रैल को, दूसरे चरण का चुनाव 18 अप्रैल को , तीसरा चरण का चुनाव 23 अप्रैल को , चैथे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को, पांचवे चरण का चुनाव 6 मई को , छठवें चरण का चुनाव 12 मई और सातवें चरण का चुनाव 19 मई को होगा. वोटों की गिनती 23 मई को की जाएगी।

Lok Sabha elections to be held in seven phases – May 22

सुनील अरोड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रैस वार्ता में कहा कि चुनाव में 90 करोड़ वोट डाले जांऐगें। ईवीएम पर उम्मीदवार की फोटो होगी। 18 से 19 साल के 1. 5 करोड़ वोट है युवाओं के।
-हर पोलिंग बूथ पर वीवीपेट मशीन होगंी।
-चुनाव में नोटा का ईस्तेमाल होगा।
-अभी से आचार संहिता लागू
-मतदान से 48 घंटे पहले लाउडस्पीकर पर रोक
-रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर बैन
-सभी सवेंदनशील ईलाकों में सीआरपीएफ होगी तैनात
-कन्ट्रोल रुम में 24 घंटे टोल फ्री नंबर
-सभी उम्मीदवारों को हलफनामा देना होगा
-निष्पक्ष चुनाव के लिए होगा पुख्ता इंतजाम
-आपराधिक मामलों की जानकारी उम्मीदवार को होगी देनी
-चुनावों के लिए हैल्प लाईन नंबर 1950
-8.4 करोड़ नए मतदाता
-शिकायत के लिए एप बनाया गया
ईवीएम की जीपीएस टैªकिंग की जाएगी
-शिकायत के 100 मिनट में होगी कार्रवाई
-10 लाख होगें मतदान केन्द्र
-उम्म्ीदवारों को सोशल मिडीया की जानकारी देनी होगी
-मतदान केन्द्रो पर होगें सीसीटीवी कैमरें होगंे
-सोशल मीडिया पर भी चुनाव आयोग की कड़ी नजर है।

अब यह नहीं कर सकेगें-
चुनाव आचार संहिता चुनाव आयोग के बनाए गए नियम हैं, जिनका पालन हर पार्टी और हर उम्मीदवार के लिए जरूरी है। इनका उल्लंघन करने पर सख्त सजा व जुर्माना,चुनाव लड़ने पर रोक,एफआईआर व उम्मीदवार को जेल भी जाना पड़ सकता है।
वहीं चुनाव के दौरान कोई भी मंत्री सरकारी दौरे को चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता। सरकारी संसाधनों का किसी भी तरह चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आचार संहिता लगने के बाद केंद्र सरकार हो या किसी भी प्रदेश की सरकार, न तो कोई घोषणा कर सकती है, न शिलान्यास, न लोकार्पण और ना ही भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा कोई भी आयोजन नहीं होता है जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। इस पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक भी नियुक्त करता है।

उम्मीदवार और पार्टी को जुलूस निकालने या रैली और बैठक करने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होती है और इसकी जानकारी निकटतम थाने में भी देनी होती है। सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को देना होती है।कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा काम नहीं कर सकती, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।मत पाने के लिए रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना भारी पड़ सकता है। व्यक्ति टिप्पणियां करने पर भी चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है।किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार या भूमि का उपयोग नहीं किया जा सकता। मतदान के दिन मतदान केंद्र से सौ मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार पर रोक और मतदान से एक दिन पहले किसी भी बैठक पर रोक।

इतनी सीटें है लोकसभा में-

संविधान के मुताबिक लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है. फिलहाल लोकसभा सीटों की संख्या 545 है, जिनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 543 सीटों के लिए आम चुनाव होते हैं. इनके अलावा अगर राष्ट्रपति को लगता है कि एंग्लो-इंडियन समुदाय के लोगों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व काफी नहीं है तो वह दो लोगों को नामांकित भी कर सकते हैंकुल सीटों में से 131 लोकसभा सीटें रिजर्व होती हैं. इन 131 में अनुसूचित जाति के लिए 84 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें रिजर्व हैं. यानी इन सीटों पर कोई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं.

इससे संबधित ओर खबरों के लिए यहां क्लिक करें-

किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए कम से कम 272 सीटें चाहिए होती हैं. अगर बहुमत से कुछ सीटें कम भी पड़ जाएं तो दूसरे दलों के साथ गठबंधन करके भी सरकार बनाई जा सकती है. राजनीतिक दलों का गठबंधन चुनाव से पहले भी हो सकता है और नतीजों के बाद भी. लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद लेने के लिए विपक्षी पार्टी के पास कम से कम कुल सीटों की 10 फीसदी संख्या होनी चाहिए यानी 55 सीटें. 2014 के आम चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटें ही मिल पाई थीं।

 

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