15 साल तक के बच्चों को लगेगा रूबेला-#measles का टीका

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Children up to 15 years will think of rubella-measles vaccine

Children up to 15 years will think of rubella-measles vaccine

हनुमानगढ़.प्रदेश के साथ ही जिले में भी निमोनिया को लेकर निःशुल्क टीके की शुरुआत के बाद अब सरकार की ओर से रुबेला और#measles
खसरा रोग से बचाने के लिए बच्चों को निःशुल्क टीके लगाए जाएंगे.इसके लिए खसरा-रुबेला (एमआर) के टीके बच्चों को लगाए जाएंगे.मिजल्स रुबेला अभियान के तहत टीका नौ माह से 15 साल तक के उम्र के सभी बच्चों को सभी स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाया जाएगा.

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टीका उन बच्चों को भी लगाया जाएगा, जिन्हें पहले भी एमआर का टीका लगाया जा चुका है.टीकाकरण जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू होगा.कुछ ही दिन पहले प्रमुख चिकित्सा सचिव डॉ. समित शर्मा ने महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) कर तैयारियां करने के निर्देश दिए थे.

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सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि खसरा से हर साल 50 हजार बच्चों की मौत भारत में हो जाती है. रुबेला से गर्भवती माताओं के अबोर्शन, नवजात की मौत, नवजात को जन्मजात बीमारी का खतरा रहता है, अगर जन्म ले भी लेता है तो उसका जीवन भी परेशानियों से भरा होता है. पूरी दुनिया में लगभग सभी देशों में यह अभियान पूर्ण हो चुका है.भारत के भी कुछ राज्यों में यह अभियान पूरा हो चुका है व कुछ राज्यों में होने जा रहा है.भारत में 36 करोड़ बच्चों को यह टीका सुरक्षित तरीके से लगाया जा चुका है. यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है.

खसरा के लक्षण और इसलिए जरूरी है ये टीका

डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि खसरा वायरस जनित जानलेवा रोग है। इसमें बुखार, खांसी, जुकाम, आंखें लाल होना आदि लक्षण दिखते हैं. बच्चों में खसरे के कारण विकलांगता और अनहोनी का खतरा रहता है. इस बीमारी में बुखार, खांसी, जुकाम, आंखें लाल होने की शिकायत हो जाती है.खसरे के चकत्ते बुखार आने के दो दिन बाद दिखते हैं.इसमें डायरिया, निमोनिया, मस्तिष्क की सूजन जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं.इस टीके के जरिए बच्चों में जन्मजात बीमारी दूर होगी.बहरापन, मोतियाबिंद व हृदय से जुड़ी बीमारियों से छुटकारा मिलेगा.

15 साल तक के बच्चों को लगेगा रूबेला-खसरे का टीका

उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह अभियान सभी तरह की स्कूलों में चलाया जाएगा.सरकारी, प्राइवेट, मदरसा, अन्य प्रकार के शिक्षा केंद्र सभी इसमें शामिल होंगे.इसके लिए सभी स्कूल अपने एक से दस कक्षा के बच्चों की संख्या कक्षा वाइज व सैक्शन वाइज देंगे.शिक्षण संस्था को फॉर्म-1 भरकर देना होगा, जिसमें बच्चों की संख्या का विवरण होगा.टीकाकरण से वंचित बच्चों की लिस्ट देनी होगी, जिन्हें बाद मे टीके लगाने की कार्रवाई की जाएगी.

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