‘मैं भी मुंह में जुबां रखती हूं’ कार्यक्रम में बेबाकी से बोली महिलाएं

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लूनकरणसर-चूल्हा-चौका संभालने वाले हाथों में माइक, आंखों में भरोसा और बेबाकी के साथ मुंह से फूटते बोल.! कुछ ऐसा ही दृश्य नजर आया गोपल्याण स्थित इक्कीस कॉलेज में। अवसर था “मैं भी मुंह में जुबां रखती हूं’  कार्यक्रम का, जहां  लूनकरणसर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आई महिलाओं ने शिक्षा व समाज से जुड़े विषयों पर खुलकर बात की।

Women in the program, "I also keep juban in my mouth"

इक्कीस कॉलेज और स्कूल की छात्राओं तथा शिक्षकों से संवाद कर शिक्षा के विभिन्न आयामों पर चर्चा भी की। अधिकांश महिलाओं का कहना था कि पढ़ना जीवन को सही दिशा देना है। शिक्षा का मकसद केवल सरकारी नौकरी भर नहीं है, बल्कि पढ़ लिख कर एक महिला अपने घर परिवार के बेहतर संचालन में सक्षम बन सकती है। कार्यक्रम की संकल्पना को उद्घाटित करते हुए कॉलेज प्रबंधक आशा शर्मा ने कहा कि महिला कोमल है मगर कमजोर नहीं है। युवा सहित्यकार एवं प्रिंसिपल राजूराम बिजारणियां ने कहा कि घर परिवार का कुशलता पूर्वक संचालन करने वाली महिला शक्ति सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार डॉ.हरिमोहन सारस्वत बोले कि घर का संचालन वस्तुतः एक प्रबंधकीय कौशल है। आय के अनुरूप सीमित खर्च में घर का संचालन करते हुए प्रत्येक सदस्य की जरूरतों का ध्यान  एक स्त्री से बेहतर और कोई नहीं रख सकता। कार्यक्रम के दौरान राजस्थानी रीति रिवाजों को रिप्रजेंट करते लोकगीतों की प्रस्तुति के एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ी क्विज प्रतियोगिता के अलावा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया जिसमें ग्रामीण महिलाओं ने बढ़चढ़कर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई।

सूरतगढ़, महाजन, गोपल्यान, एलकेडी सहित कई जगहों से महिलाएं इस आयोजन में शरीक हुई। जयश्री रूंख, माया स्वामी, प्रतिभारानी ने सब महिलाओं की अगुवानी की। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं को सम्मानित किया गया। मंच संयोजन नेहा लखोटिया ने किया।

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